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12:16:06 pm, Wednesday, 1 February 2023
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सलूणी, ( दिनेश ): इन दिनों MANREGA ऑनलाइन हाजिरी के खिलाफ पंचायत प्रतिनिधि लामबंद है। इसी कड़ी में अब जिला चंबा के विकास खंड सलूणी मुख्यालय पंचायत प्रतिनिधि जुटेंगे और एकता का परिचय देते हुए लागू नई व्यवस्था के खिलाफ विरोध दर्ज करवाएंगे।
प्रहलाद कुमार देवल उपप्रधान प्रधान संघ विकास खंड सलूणी
प्रधान संघ विकास खंड सलूणी ने इसके लिए 2 फरवरी यानी वीरवार को बैठक बुलाई है। बैठक मेंमनरेगा की नई व्यवस्थाको लेकर चर्चा की जाएगी और इसके उपरांत उपमंडल प्रशासन के माध्यम से सरकार को इस नई हाजरी व्यवस्था को लेकर सरकार को ज्ञापन भेजा जाएगा। यह जानकारी उपप्रधान संघ विकास खंड सलूणी एवं प्रधान ग्राम पंचायत बाड़का प्रहलाद कुमार देवल ने दी।
उन्होंने बताया कि मनरेगा ऑनलाइन हाजिरी व्यवस्था तो कर दी गई लेकिन इस बात को ध्यान में क्यों नहीं रखा गया कि कई पंचायत प्रतिनिधि इस आधुनिक तकनीक का प्रयोग करना नहीं जानते है तो कई ऐसे पंचायत प्रतिनिधि भी हैं जो कि स्मार्ट फोन तक चलाना नहीं जानते है। यही नहीं जिला चंबा की भौगोलिक स्थिति इतनी अधिक विकट है कि हर पंचायत व हर गांव में नेट की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
उन्होंने कहा कि विकास के साथ रोजगार का आधार मनरेगा को इस कदर जटिल बनाया गया है कि पंचायत प्रतिनिधियों के लिए यह सिरदर्द बनता नजर आ रहा है तो साथ ही विकास की राह में रोड़ा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि ऑन लाइन हाजरी व्यवस्था के सही ढंग से काम नहीं करने के चलते लोगों को रोजगार नहीं मिल रहा है। जिस कारण लोगों में इस नई व्यवस्था को लेकर भारी रोष पैदा हो रहा है।
प्रहलाद ने बताया कि मनरेगा में 20 से अधिक कार्यों पर रोक लगाने से जहां मनरेगा के तहत रोजगार पाने के लिए आवेदन करने वाले सभी आवेदकों को रोजगार मुहैया नहीं हो रहा है तो अब पंचायत प्रतिनिधियों के लिए यह नये आदेश सिरदर्द बने है। इन तमाम विषयों को लेकर सलूणी उपमंडल मुख्यालय में वीरवार 2 फरवरी को संघ के सभी पंचायत प्रतिनिधि सदस्यों के साथ बैठक कर चर्चा की जाएगी और उसके बाद उपमंडल प्रशासन के माध्यम से सरकार को इस बारे लिखित तौर पर ज्ञापन भेजा जाएगा।
ज्ञापन में उपरोक्त समस्याओं के अलावा मनरेगा की दिहाड़ी बढ़ा कर 350 रुपए करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रहेगी। महंगाई के दौर में इतने कम पैसे में मनरेगा में मजदूरी करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि विकास खंड सलूणी की बात करे तो इन तमाम परिस्थितियों की वजह से यहां 50 दिनों से भी कम श्रमिक दिवस अर्जित हो पाए हैं। इस बैठक में इस मामले पर आगामी रणनीति पर भी चर्चा की जाएगी।