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6:10 am, Friday, 4 April 2025

देखे भरमौर में आग कैसे तांडव कर रही

आग पर काबू पाना चुनौती बना, स्थानीय लोग विभाग के साथ मिलकर प्रयासरत

भरमौर, (ठाकुर):  हिमाचल के जनजातीय उपमंडल भरमौर में आग लगी है जिस वजह से हर तरफ धुआं ही धुआं फैला हुआ है। उधर इस उपमंडल के इकलौते चिलगोजे के जंगल के जलने का खतरा पैदा हो गया है। भरमौर की ग्राम पंचायत खणी के अर्की जंगल मे लगी भयानक आग ने पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया।
इस आग से अर्की, बाहलो,डागोता तथा डंडारडा के सेब के बगीचों में खड़े सैंकड़ों पेड़-पौधों को खतरा पैदा हो गया है। यही नहीं बाहलो तथा अर्की गांवों के समीप यह आग पहुंच गई है।

 

इन सभी गांवों के युवा आग को बुझाने का भरसक प्रयास कर रहे हैं मगर फरवरी महीने के बाद आजतक बारिश न होने के कारण पैदा हुई सूखे की स्थिति की वजह से जंगल में सूखी घास, कैल तथा देवदार की सूखी पत्तियां आग को और अधिक फैलने में मददगार साबित हो रही है।

 

एक सप्ताह पहले मलकोता के जंगल मे लगी थी जिसने भरमाणी माता, घराडू, चलेड व मोरु के जंगलों को जलाया था। अब अर्की जंगल में लगी इस आग ने भरमौर के इकलौते चिलगोजे के जंगल को तो अपनी चपेट में लिया ही है वहीं इससे सेब के बगीचों के साथ कई गांवों को खतरा पैदा करने का काम किया है।

 

वन विभाग के वन रक्षक स्थानीय युवाओं के साथ मिलकर मिट्टी आदि फेंक कर आग को बुझाने में जुटे हुए है। अर्की के स्थानीय युवाओं की मेहनत रंग लाती हुई उस समय नजर आई जब आग पर थोड़ा बहुत नियंत्रण पा लिया गया।

 

इस संदर्भ में वन परिक्षेत्र अधिकारी जितेंद्र सिंह ने बताया कि जैसे ही जंगल में आग लगने की सूचना उन्हें मिली तो उसी वक्त वन रक्षक अर्की तथा लाहल को मौके पर भेज दिया गया। खुद भी वह स्थानीय लोगों के साथ मिलकर इस आग पर काबू पाने में जुटे हुए है। 
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VINOD KUMAR

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देखे भरमौर में आग कैसे तांडव कर रही

Update Time : 10:51:20 pm, Monday, 6 June 2022

आग पर काबू पाना चुनौती बना, स्थानीय लोग विभाग के साथ मिलकर प्रयासरत

भरमौर, (ठाकुर):  हिमाचल के जनजातीय उपमंडल भरमौर में आग लगी है जिस वजह से हर तरफ धुआं ही धुआं फैला हुआ है। उधर इस उपमंडल के इकलौते चिलगोजे के जंगल के जलने का खतरा पैदा हो गया है। भरमौर की ग्राम पंचायत खणी के अर्की जंगल मे लगी भयानक आग ने पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया।
इस आग से अर्की, बाहलो,डागोता तथा डंडारडा के सेब के बगीचों में खड़े सैंकड़ों पेड़-पौधों को खतरा पैदा हो गया है। यही नहीं बाहलो तथा अर्की गांवों के समीप यह आग पहुंच गई है।

 

इन सभी गांवों के युवा आग को बुझाने का भरसक प्रयास कर रहे हैं मगर फरवरी महीने के बाद आजतक बारिश न होने के कारण पैदा हुई सूखे की स्थिति की वजह से जंगल में सूखी घास, कैल तथा देवदार की सूखी पत्तियां आग को और अधिक फैलने में मददगार साबित हो रही है।

 

एक सप्ताह पहले मलकोता के जंगल मे लगी थी जिसने भरमाणी माता, घराडू, चलेड व मोरु के जंगलों को जलाया था। अब अर्की जंगल में लगी इस आग ने भरमौर के इकलौते चिलगोजे के जंगल को तो अपनी चपेट में लिया ही है वहीं इससे सेब के बगीचों के साथ कई गांवों को खतरा पैदा करने का काम किया है।

 

वन विभाग के वन रक्षक स्थानीय युवाओं के साथ मिलकर मिट्टी आदि फेंक कर आग को बुझाने में जुटे हुए है। अर्की के स्थानीय युवाओं की मेहनत रंग लाती हुई उस समय नजर आई जब आग पर थोड़ा बहुत नियंत्रण पा लिया गया।

 

इस संदर्भ में वन परिक्षेत्र अधिकारी जितेंद्र सिंह ने बताया कि जैसे ही जंगल में आग लगने की सूचना उन्हें मिली तो उसी वक्त वन रक्षक अर्की तथा लाहल को मौके पर भेज दिया गया। खुद भी वह स्थानीय लोगों के साथ मिलकर इस आग पर काबू पाने में जुटे हुए है।