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10:31 pm, Friday, 4 April 2025

Himachal News : अभी तैयारियां हैं अधूरी, ट्रामा सेंटर खोलना बना मजबूरी

Chamba Trauma Care Center

Chamba Trauma Care Center : जिला चंबा में ट्रामा केयर सेंटर की सुविधा शुक्रवार से शुरू हो गई। इस काम को इस कदर गुपचुप तरीके से अंजाम दिया गया कि हर कोई इस बात पर हैरान है। अधिकारियों पर दबाव इतना ज्यादा की कोई भी कुछ बताने को राजी नहीं।

चंबा, ( विनोद ): हैरान करने वाली बात है कि सुविधाओं को जुटाने से पहले ही इस ट्रामा केयर सेंटर को कार्यात्मक कर दिया गया और किसी को कानों कान तक खबर नहीं होने दी। मेडिकल कॉलेज चंबा के अधिकारियों पर ऊपर से इस स्तर का दवाब था कि कोई भी अधिकारी इस बारे में कुछ भी कहने पर अपनी नौकरी जाने की दुहाई दे रहा था।

फिलहाल पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज चंबा के सरोल परिसर में ट्रॉमा सेंटर तो खोल दिया गया है लेकिन इसमें अभी तक विशेषज्ञ चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ(paramedical staff) सहित उन आधुनिक चिकित्सा जांच मशीनों की कमी है जो कि किसी भी ट्रामा केयर सेंटर के सही क्रियान्वयन के लिए बेहद जरुरी माने जाते है।

ट्रामा केयर सेंटर चंबा की बात करे तो यहां अभी तक एमआरआई(MRI), सीटी स्कैन(CT scan), अल्ट्रा साउंड व एक्स-रे जैसे सुविधा उपलब्ध नहीं है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल चंबा पहले ही विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ-साथ पेरामेडिकल स्टाफ की कमी से जुझ रहा है। ऐसे में इन्हें में से कुछ विशेषज्ञ चिकित्सकों, पेरामेडिकल स्टाफ व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को मेडिकल काॅलेज परिसर सरोल में शिफ्ट यानी तैनात किया गया है।

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इस काम चलाऊ व्यवस्था की वजह से मेडिकल कॉलेज अस्पताल चंबा में उपचार करवाने के लिए आने वाले रोगियों को अब चिकित्सकों की अधिक कमी होने की वजह से अधिक परेशानी पेश आएगी। हैरान करने वाली बात है कि ट्रामा केयर सेंटर सरोल में अगर किसी दुर्घटना(Accident) में गंभीर रुप से हुए घायल व्यक्ति को लाया गया तो सी.टी. स्कैन, एम.आर.आई की सुविधा पाने को उसे चंबा अस्पताल ले जाना पड़ेगा।

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वहां टैस्ट करवाने के बाद उपचार के लिए सरोल लाना किसी भी लिहाज से सही कदम नहीं कहा जा सकता है। ऐसे में सवाल यह पैदा होता है कि स्वास्थ्य विभाग ने आखिर आनन फानन में यह कदम क्यों उठाया। बेहतर चिकित्सा(Treatment) सुविधा मुहैया करवाने की नाम पर जिला चंबा के लोगों की आंखों में धूल झोंकने का काम क्यों किया गया।

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VINOD KUMAR

Himachal News : अभी तैयारियां हैं अधूरी, ट्रामा सेंटर खोलना बना मजबूरी

Update Time : 08:29:58 pm, Friday, 7 June 2024

Chamba Trauma Care Center : जिला चंबा में ट्रामा केयर सेंटर की सुविधा शुक्रवार से शुरू हो गई। इस काम को इस कदर गुपचुप तरीके से अंजाम दिया गया कि हर कोई इस बात पर हैरान है। अधिकारियों पर दबाव इतना ज्यादा की कोई भी कुछ बताने को राजी नहीं।

चंबा, ( विनोद ): हैरान करने वाली बात है कि सुविधाओं को जुटाने से पहले ही इस ट्रामा केयर सेंटर को कार्यात्मक कर दिया गया और किसी को कानों कान तक खबर नहीं होने दी। मेडिकल कॉलेज चंबा के अधिकारियों पर ऊपर से इस स्तर का दवाब था कि कोई भी अधिकारी इस बारे में कुछ भी कहने पर अपनी नौकरी जाने की दुहाई दे रहा था।

फिलहाल पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज चंबा के सरोल परिसर में ट्रॉमा सेंटर तो खोल दिया गया है लेकिन इसमें अभी तक विशेषज्ञ चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ(paramedical staff) सहित उन आधुनिक चिकित्सा जांच मशीनों की कमी है जो कि किसी भी ट्रामा केयर सेंटर के सही क्रियान्वयन के लिए बेहद जरुरी माने जाते है।

ट्रामा केयर सेंटर चंबा की बात करे तो यहां अभी तक एमआरआई(MRI), सीटी स्कैन(CT scan), अल्ट्रा साउंड व एक्स-रे जैसे सुविधा उपलब्ध नहीं है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल चंबा पहले ही विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ-साथ पेरामेडिकल स्टाफ की कमी से जुझ रहा है। ऐसे में इन्हें में से कुछ विशेषज्ञ चिकित्सकों, पेरामेडिकल स्टाफ व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को मेडिकल काॅलेज परिसर सरोल में शिफ्ट यानी तैनात किया गया है।

ये भी पढ़ें : जिला चंबा में एक और दर्दनाक हादसा।

इस काम चलाऊ व्यवस्था की वजह से मेडिकल कॉलेज अस्पताल चंबा में उपचार करवाने के लिए आने वाले रोगियों को अब चिकित्सकों की अधिक कमी होने की वजह से अधिक परेशानी पेश आएगी। हैरान करने वाली बात है कि ट्रामा केयर सेंटर सरोल में अगर किसी दुर्घटना(Accident) में गंभीर रुप से हुए घायल व्यक्ति को लाया गया तो सी.टी. स्कैन, एम.आर.आई की सुविधा पाने को उसे चंबा अस्पताल ले जाना पड़ेगा।

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वहां टैस्ट करवाने के बाद उपचार के लिए सरोल लाना किसी भी लिहाज से सही कदम नहीं कहा जा सकता है। ऐसे में सवाल यह पैदा होता है कि स्वास्थ्य विभाग ने आखिर आनन फानन में यह कदम क्यों उठाया। बेहतर चिकित्सा(Treatment) सुविधा मुहैया करवाने की नाम पर जिला चंबा के लोगों की आंखों में धूल झोंकने का काम क्यों किया गया।

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