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6:44 pm, Sunday, 31 May 2026

भाजपा सरकार ने बिना बजट खर्च कर दिए 623 करोड़, कैग रिपोर्ट से खुलासा, वित्तीय हालत में सुधार की राय

चंबा की आवाज: हिमाचल की पूर्व भाजपा सरकार ने चुनावी वर्ष में 623.40 करोड़ रुपए बिना बजट प्रावधान के खर्च किए। शुक्रवार को उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने शुक्रवार को सदन में जो नियंत्रक महालेखा परीक्षक कैग की रिपोर्ट पेश की उससे यह खुलासा हुआ। कैग की रिपोर्ट में हिमाचल सरकार के वित्त प्रबंधन पर कई गंभीर सवाल खड़े किए गए है।
रिपोर्ट में बगैर बजट खर्च की गई राशि को वित्तीय अनियमितता बताया और सरकार को भविष्य में सरकार राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन कानू के प्रावधानों का पालन करने की सलाह दी है। ऐसा नहीं करने से राज्य का राजकोषीय घाटा मौजूदा वित्त वर्ष में 4.98 प्रतिशत से बढ़कर 5.84 फीसदी होने का अनुमान है।
वित्तीय वर्ष 2021-22 में सरकार ने 7.87 रुपए के खर्च के प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए। इसलिए कैग ने इसे सस्पेंस अकाउंग में रखा है। कैग के अनुसार ज्यादातर विभागों ने विभिन्न योजनाओं का बजट खर्च करने के बाद उसके यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट ही जमा नहीं कराए। 4752 करोड़ रुपए से ज्यादा के काम के सर्टिफिकेट नहीं मिलने पर केंद्र सरकार ने संबन्धित विभागों को बार-बार सर्टिफिकेट देने को लिखा, बावजूद इसके विभागों ने 2359.15 करोड़ रुपए के 1796 काम के प्रमाण पत्र जमा नहीं करवाए।

 

ये भी पढ़ें: सलूणी के किसान अब इस समस्या से खुद निपट लेंगे।

 

हिमाचल को केंद्र से मिलने वाली 3500 करेाड़ रुपए की ज्यादा GST प्रतिपूर्ति राशि बंद होने से राज्य की वित्तीय हालत ओर खराब हो रही है। GST प्रतिपूर्ति राशि जून 2022 से मिलनी बंद हो गई है जिस कारण हिमाचल की हार्थिक हालत तेजी से बिगड़ रही है। सरकारी एजैंसी के अनुसार राजकोषीय घाटा 3.5 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए, लेकिन चालू वित्तीय वर्ष में इसके 5.84 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है।
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vinod Kumar

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भाजपा सरकार ने बिना बजट खर्च कर दिए 623 करोड़, कैग रिपोर्ट से खुलासा, वित्तीय हालत में सुधार की राय

Update Time : 04:19:40 pm, Friday, 6 January 2023
चंबा की आवाज: हिमाचल की पूर्व भाजपा सरकार ने चुनावी वर्ष में 623.40 करोड़ रुपए बिना बजट प्रावधान के खर्च किए। शुक्रवार को उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने शुक्रवार को सदन में जो नियंत्रक महालेखा परीक्षक कैग की रिपोर्ट पेश की उससे यह खुलासा हुआ। कैग की रिपोर्ट में हिमाचल सरकार के वित्त प्रबंधन पर कई गंभीर सवाल खड़े किए गए है।
रिपोर्ट में बगैर बजट खर्च की गई राशि को वित्तीय अनियमितता बताया और सरकार को भविष्य में सरकार राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन कानू के प्रावधानों का पालन करने की सलाह दी है। ऐसा नहीं करने से राज्य का राजकोषीय घाटा मौजूदा वित्त वर्ष में 4.98 प्रतिशत से बढ़कर 5.84 फीसदी होने का अनुमान है।
वित्तीय वर्ष 2021-22 में सरकार ने 7.87 रुपए के खर्च के प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए। इसलिए कैग ने इसे सस्पेंस अकाउंग में रखा है। कैग के अनुसार ज्यादातर विभागों ने विभिन्न योजनाओं का बजट खर्च करने के बाद उसके यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट ही जमा नहीं कराए। 4752 करोड़ रुपए से ज्यादा के काम के सर्टिफिकेट नहीं मिलने पर केंद्र सरकार ने संबन्धित विभागों को बार-बार सर्टिफिकेट देने को लिखा, बावजूद इसके विभागों ने 2359.15 करोड़ रुपए के 1796 काम के प्रमाण पत्र जमा नहीं करवाए।

 

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हिमाचल को केंद्र से मिलने वाली 3500 करेाड़ रुपए की ज्यादा GST प्रतिपूर्ति राशि बंद होने से राज्य की वित्तीय हालत ओर खराब हो रही है। GST प्रतिपूर्ति राशि जून 2022 से मिलनी बंद हो गई है जिस कारण हिमाचल की हार्थिक हालत तेजी से बिगड़ रही है। सरकारी एजैंसी के अनुसार राजकोषीय घाटा 3.5 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए, लेकिन चालू वित्तीय वर्ष में इसके 5.84 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है।