हिमाचल के जिला चंबा में भगवान दत्तात्रेय जयंती 2023 धूमधाम से मनाई जाएगी। चंबा के दशनाम अखाड़ा में इस पावन अवसर पर विशाल भंडारा आयोजित होगा।
चंबा ( विनोद ): भगवान दत्तात्रेय जयंती 2023( Bhagavaan Dattatrey Jayantee 2023) दशनाम जूना अखाड़ा चंबा में हर वर्ष की भांति धूमधाम से मनाई जाएगी। सोमवार को चंबा के दशनाम जूना अखाड़ा में रामायण पाठ का शुभारंभ हुआ। इस मौके पर भक्तों ने भजन कीर्तन किया और प्रसाद वितरण के साथ ही रामायण पाठ शुरू हुआ जो मंगलवार की दोपहर को हवन की पूर्णाहुति के साथ संपन्न होगा।
भगवान दत्तात्रेय का जन्म
इस धार्मिक कार्यक्रम बारे जानकारी देते हुए श्री दशनाम जूना अखाड़ा चंबा के महंत यतेंद्र गिरी ने बताया कि भगवान दत्तात्रेय का जन्म पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार नारद जी माता पार्वती के पास जाकर देवी अनुसूया के पतिव्रत धर्म का गुणगान करने लगे। वहां मौजूद तीनों देवियों को इस बात से ईर्ष्या होने लगी। नारद जी के विदा होने के बाद वे तीनों देवियां अत्रि ऋषि की पत्नी देवी अनुसूया के पतिव्रत धर्म को तोड़ने को लेकर चर्चा करने लगीं।
परिणामस्वरुप तीनों देवियों ने अपने पतियों से देवी अनुसूया का पतिव्रता धर्म तोड़ने के लिए कहा। विवश होने पर त्रिदेव ब्रह्मा ( Lord Brahma), विष्णु(Lord Vishnu) व शिव(Lord Shiva) भिक्षुक रूप में देवी अनुसूया के आश्रम पहुंचे। देवी अनुसूया भिक्षा लेकर आईं, लेकिन त्रिदेव ने लेने से इनकार दिया और भोजन करने की इच्छा जताई। देवी अनुसूया मान गईं, भोजन बनाकर खाने के लिए बुलाया। त्रिदेव आसन पर बैठ गए और उन्होंने देवी अनुसूया को नग्न होकर भोजन परोसने को कहा।
देवियों ने अनुसूया से माफी मांगी
देवी अनुसूया पहले नाराज हुईं, लेकिन बाद में अपने तपोबल से त्रिदेव को पहचान लिया। फिर त्रिदेव को बाल स्वरूप में कर दिया। उन्होंने तीनों को भोजन कराया। फिर तीनों को सुला दिया। मां की तरह उनका लालन-पालन करने लगीं। कुछ दिन बीतने पर तीनों देवियों को चिंता सताने लगी। त्रिदेव वापस नहीं आए। फिर वे तीनों देवी अनुसूया के पास गईं और अपनी गलती के लिए क्षमा मांगी। तीन देवियों ने त्रिदेव को वापस लौटाने को कहा। देवी अनुसूया ने इंकार कर दिया। तब तीनों देवियों ने ब्रह्मा, विष्णु और शिव जी के अंश से दत्तात्रेय को उत्पन्न किया और उनकों पुत्र के रूप में देवी अनुसूया को सौंप दिया। दत्तात्रेय को पुत्र स्वरूप में पा कर देवी अनुसूया ने अपने तपोबल से त्रिदेव को उनके मूल स्वरूप में कर दिया। इस प्रकार से भगवान दत्तात्रेय का जन्म हुआ।
ब्रह्मा, विष्णु और महेश का अंश अवतार है भगवान दत्तात्रेय
हिंदू धर्म के अनुसार हर साल मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा(Margashirsha Purnima) के दिन भगवान दत्तात्रेय की जयंती मनाई जाती है। भगवान दत्तात्रेय को ब्रह्मा, विष्णु और महेश का अंश अवतार माना जाता है। मार्गशीर्ष मास में पड़ने वाली पूर्णिमा तिथि के दिन भगवान दत्तात्रेय का जन्म हुआ था।
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