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10:02 am, Sunday, 3 May 2026

इस बार शिवरात्रि का इस कारण है विशेष महत्व

मनोकामना पूर्ति के लिए इस तरह करें महादेव का पूजन

चंबा की आवाज………. शिवरात्रि विशेष

वीरवार यानी 11 मार्च 2021 को महाशिवरात्री धूमधाम से मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष फाल्गुन मास के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्री का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष महाशिवरात्री पर विशेष योग बन रहा है। इस रोज शिव योग के साथ सिद्ध योग भी बन रहा है। ऐसा माना जाता है कि इस रोज जलाभिषेक करने से शिव भक्तों पर भगवान भोले नाथ अपनी असीम कृपा बरसाते है।

महाशिवरात्रि के पर्व पर भगवान शिव की पूजा में दूध का विशेष महत्त्व है। जल में थोड़ा सा दूध मिलाकर शिवलिंग का जलाभिषेक करवाने से मानिसक तनाव दूर होता है और चिंताएं समाप्त होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जल में थोड़ा दूध मिलाकर जलाभिषेक करने से या शिवलिंग पर दूध चढ़ाने से भी मनोकामनाएं पूरी होती है। इस रोज महादेव की पूजा करते समय बिल्वपत्र, शहद, दूध, दही, शक्कर और गंगाजल से जलाभिषेक करना चाहिए।

इस बार की शिवरात्री महापर्व की एक ओर विशेषता यह है कि त्रयोदशी और चतुदर्शी तिथियां पड़ रही है। इस दृष्टि से जलाभिषेक का महत्व और भी बढ़ गया है। हिंदू धर्म शास्त्रों में महाशिवरात्रि पर्व पर त्रयोदशी व चतुदर्शी में जलाभिषेक का विधान बताया गया है। त्रयोदशी तिथि 10 मार्च की दोपहर 2 बजकर 40 मिनट से शुरू होकर 11 मार्च को 2 बजकर 40 मिनट तक रहेगी। इसके तुरंत बाद चतुदर्शी शुरू हो जाएगी। शिव मंदिरों में त्रयोदशी का जलाभिषेक 11 मार्च की सुबह 4 बजकर 1 मिनट से शुरू होकर पूरा दिन भी चलेगा। चतुदर्शी का जलाभिषेक इसी दिन दोपहर 3 बजे से शुरू होकर शाम तक चलेगा। महाशिवरात्रि का निशीथ काल जो कि इस रोज सर्वोत्तम समय हेाता है 11 मार्च की रात 12 बजकर 6 मिनट से रात 12 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। महाशिवरात्रि का पर्व रात्रि में मनाया जाना वाला पर्व है इसलिए महाशिवरात्रि को पूजन चारों पहर करने का विशेष महत्त है।

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vinod Kumar

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इस बार शिवरात्रि का इस कारण है विशेष महत्व

Update Time : 04:13:57 am, Thursday, 11 March 2021

मनोकामना पूर्ति के लिए इस तरह करें महादेव का पूजन

चंबा की आवाज………. शिवरात्रि विशेष

वीरवार यानी 11 मार्च 2021 को महाशिवरात्री धूमधाम से मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष फाल्गुन मास के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्री का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष महाशिवरात्री पर विशेष योग बन रहा है। इस रोज शिव योग के साथ सिद्ध योग भी बन रहा है। ऐसा माना जाता है कि इस रोज जलाभिषेक करने से शिव भक्तों पर भगवान भोले नाथ अपनी असीम कृपा बरसाते है।

महाशिवरात्रि के पर्व पर भगवान शिव की पूजा में दूध का विशेष महत्त्व है। जल में थोड़ा सा दूध मिलाकर शिवलिंग का जलाभिषेक करवाने से मानिसक तनाव दूर होता है और चिंताएं समाप्त होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जल में थोड़ा दूध मिलाकर जलाभिषेक करने से या शिवलिंग पर दूध चढ़ाने से भी मनोकामनाएं पूरी होती है। इस रोज महादेव की पूजा करते समय बिल्वपत्र, शहद, दूध, दही, शक्कर और गंगाजल से जलाभिषेक करना चाहिए।

इस बार की शिवरात्री महापर्व की एक ओर विशेषता यह है कि त्रयोदशी और चतुदर्शी तिथियां पड़ रही है। इस दृष्टि से जलाभिषेक का महत्व और भी बढ़ गया है। हिंदू धर्म शास्त्रों में महाशिवरात्रि पर्व पर त्रयोदशी व चतुदर्शी में जलाभिषेक का विधान बताया गया है। त्रयोदशी तिथि 10 मार्च की दोपहर 2 बजकर 40 मिनट से शुरू होकर 11 मार्च को 2 बजकर 40 मिनट तक रहेगी। इसके तुरंत बाद चतुदर्शी शुरू हो जाएगी। शिव मंदिरों में त्रयोदशी का जलाभिषेक 11 मार्च की सुबह 4 बजकर 1 मिनट से शुरू होकर पूरा दिन भी चलेगा। चतुदर्शी का जलाभिषेक इसी दिन दोपहर 3 बजे से शुरू होकर शाम तक चलेगा। महाशिवरात्रि का निशीथ काल जो कि इस रोज सर्वोत्तम समय हेाता है 11 मार्च की रात 12 बजकर 6 मिनट से रात 12 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। महाशिवरात्रि का पर्व रात्रि में मनाया जाना वाला पर्व है इसलिए महाशिवरात्रि को पूजन चारों पहर करने का विशेष महत्त है।