Dalhousie Nagar Parishad Election 2026 अब हाईवोल्टेज राजनीतिक मुकाबले में बदल चुकी है। भाजपा विधायक डी.एस. ठाकुर की आक्रामक रणनीति और बढ़ती सक्रियता ने डल्हौजी की सियासत को पूरी तरह गरमा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस बार कांग्रेस और उसके समर्थन वाले विरोधी खेमे की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हुई है।


Dalhousie Election Update: डी.एस. ठाकुर की सक्रियता से गरमाई डल्हौजी की सियासत
डल्हौजी, 9 मई। हिमाचल प्रदेश के चर्चित नगर परिषद चुनावों में शामिल नगर परिषद डल्हौजी का चुनाव इस बार बेहद दिलचस्प और हाईप्रोफाइल होता जा रहा है। मतदान की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे डल्हौजी की सियासत का तापमान भी लगातार बढ़ता जा रहा है। Dalhousie Election Update में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा भाजपा विधायक डी.एस. ठाकुर की आक्रामक रणनीति और बढ़ती सक्रियता को लेकर हो रही है, जिसने कांग्रेस और विरोधी खेमे की चिंता बढ़ा दी है।


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डल्हौजी विधानसभा क्षेत्र की राजनीति के सबसे मजबूत रणनीतिकारों में गिने जाने वाले डी.एस. ठाकुर इस बार भी नगर परिषद चुनाव को प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में लड़ रहे हैं। भाजपा समर्थित प्रत्याशी जहां वार्ड स्तर पर घर-घर जाकर वोटरों को साधने में जुटे हैं, वहीं विधायक खुद भी लगातार जनता के बीच पहुंच रहे हैं। सूत्रों के अनुसार देर रात तक रणनीतिक बैठकों, मोबाइल कैंपेन और बूथ स्तर की चुनावी प्लानिंग का दौर जारी है।


नगर परिषद डल्हौजी के नौ वार्डों में करीब तीन हजार मतदाता हैं। छोटे वार्ड और सीमित वोट बैंक होने के कारण यहां हर वोट बेहद अहम माना जा रहा है। यही वजह है कि इस बार खुले शक्ति प्रदर्शन की बजाय पर्दे के पीछे की सियासत और व्यक्तिगत संपर्क सबसे बड़ा चुनावी हथियार बन गया है।
Dalhousie Nagar Parishad Election 2026 में क्या फिर दोहराए जाएंगे 2022 वाले नतीजे?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि Dalhousie Nagar Parishad Election 2026 में भाजपा वर्ष 2022 के नगर परिषद चुनाव के परिणाम को एक बार फिर दोहरा सकती है। जानकारों की मानें तो पिछली बार भाजपा समर्थित पैनल की ऐतिहासिक जीत के पीछे भाजपा विधायक डी.एस. ठाकुर की मास्टर स्ट्रोक रणनीति सबसे बड़ा फैक्टर साबित हुई थी। अब एक बार फिर उनकी बढ़ती सक्रियता और बूथ स्तर तक पकड़ ने डल्हौजी की राजनीति को पूरी तरह गरमा दिया है। भाजपा खेमे में जहां जबरदस्त उत्साह का माहौल है, वहीं कांग्रेस और उसके समर्थकों में राजनीतिक बेचैनी साफ नजर आने लगी है।


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