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जम्मू-कश्मीर की महिला ने रच दिया इतिहास

परिवार व पति की इच्छा के विरुद्ध जाकर इस काम को दिया अंजाम

आज के दौर में महिलाएं किसी भी क्षेत्र में वर्षों से पीछे नहीं है। बल्कि यूं कहें कि कई क्षेत्रों में आज पुरुषों की अगुवाई कर रही हैं। यही वजह है कि मौजूदा दौर को महिलाओं का दौर कहा जाता है। इस दौर को अपने नाम करने के लिए महिला वर्ग ने कई ऐसे उदाहरण व प्रमाण पेश किए हैं जो इस बात को पुख्ता करता है कि अब महिलाओं की पहुंच से कुछ भी दूर नहीं है। ऐसे ही कुछ नामों में जम्मू-कश्मीर की रहने वाली पूजा देवी का नाम भी शामिल है। उसने ऐसे काम को अंजाम दिया जिसने इतिहास रचने का काम किया है। वह जम्मू-कश्मीर की पहली महिला बस ड्राइवर बनी हैं, लेकिन उनका ये सफर इतना आसान नहीं था। आज उनकी कहानी लोगों को ये संदेश देती है कि महिलाए किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। बचपन से ही उन्हें बड़ी गाड़ी चलाने का शौक था। खूब संघर्ष किया और आज वो उस मुकाम पर पहुंच गई हैं जहां वो पहुंचना चाहती थीं।

ये सब कुछ करना इतना आसान नहीं था। उनका परिवार और पति दोनों की इच्छा के बिना वो अपने इस सपने को पूरा करने के लिए आगे बढ़ीं। वो कहती हैं, ‘वो पहली बार बस चलाकर काफी खुश हैं। टैक्सी और ट्रक पहले भी चला चुकी हूं। उम्मीद नहीं थी कि कोई भरोसा जताएगा लेकिन यह सपना भी पूरा हो गया। कोई बड़े ख्वाब नहीं देखती, लेकिन ड्राइविंग को लेकर खुली आंखों से देखा सपना पूरा कर लिया है। अब मैं अन्य महिलाओं को ड्राइविंग सिखाना चाहती हूं।’

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vinod Kumar

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जम्मू-कश्मीर की महिला ने रच दिया इतिहास

Update Time : 06:31:38 am, Sunday, 27 December 2020

परिवार व पति की इच्छा के विरुद्ध जाकर इस काम को दिया अंजाम

आज के दौर में महिलाएं किसी भी क्षेत्र में वर्षों से पीछे नहीं है। बल्कि यूं कहें कि कई क्षेत्रों में आज पुरुषों की अगुवाई कर रही हैं। यही वजह है कि मौजूदा दौर को महिलाओं का दौर कहा जाता है। इस दौर को अपने नाम करने के लिए महिला वर्ग ने कई ऐसे उदाहरण व प्रमाण पेश किए हैं जो इस बात को पुख्ता करता है कि अब महिलाओं की पहुंच से कुछ भी दूर नहीं है। ऐसे ही कुछ नामों में जम्मू-कश्मीर की रहने वाली पूजा देवी का नाम भी शामिल है। उसने ऐसे काम को अंजाम दिया जिसने इतिहास रचने का काम किया है। वह जम्मू-कश्मीर की पहली महिला बस ड्राइवर बनी हैं, लेकिन उनका ये सफर इतना आसान नहीं था। आज उनकी कहानी लोगों को ये संदेश देती है कि महिलाए किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। बचपन से ही उन्हें बड़ी गाड़ी चलाने का शौक था। खूब संघर्ष किया और आज वो उस मुकाम पर पहुंच गई हैं जहां वो पहुंचना चाहती थीं।

ये सब कुछ करना इतना आसान नहीं था। उनका परिवार और पति दोनों की इच्छा के बिना वो अपने इस सपने को पूरा करने के लिए आगे बढ़ीं। वो कहती हैं, ‘वो पहली बार बस चलाकर काफी खुश हैं। टैक्सी और ट्रक पहले भी चला चुकी हूं। उम्मीद नहीं थी कि कोई भरोसा जताएगा लेकिन यह सपना भी पूरा हो गया। कोई बड़े ख्वाब नहीं देखती, लेकिन ड्राइविंग को लेकर खुली आंखों से देखा सपना पूरा कर लिया है। अब मैं अन्य महिलाओं को ड्राइविंग सिखाना चाहती हूं।’