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6:24 am, Sunday, 19 April 2026

वर्षों से जिसके लिए तरस रहें थे वह सुविधा अब जाकर मिली

5 किलोमीटर सड़क बनाने में लगे चार साल तो खर्च हुए 3 करोड़ 47 लाख

बनीखेत, (मुकेश कुमार गोल्डी): वर्षों से जिसके लिए तरस रहें थे वह सुविधा अब जाकर मिली है। भले ही इसके लिए 4 वर्ष लग गए। हम बात कर रहें है डल्हौजी विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत मनौला की। इस पंचायत के करीब तीन गांव ठंडा पानी से मंधियार गांव सड़क सुविधा के साथ जुड़ गए। महज 5 किलोमीटर लंबी इस सड़क को बनाने में 4 वर्ष लग गए।
डल्हौजी विधानसभा क्षेत्र के दायरे में आने वाली ग्राम पंचायत मनौला के लोगों का इस सुविधा को पाने का इंतजार समाप्त हो गया। एचआरटीसी ने इस सड़क पर बस का ट्रायल किया जिसमें यह सड़क खरा उतरी। इसी के चलते एसडीएम डल्हौजी जगन ठाकुर ने इस सड़क पर बस सेवा शुरू करने के लिए हरी झंडी दिखाकर बस को रवाना किया।
तरस रहें थे जो गांव वह सुविधा अब जाकर मिली
सड़क को तरसते गांवों के पंचायत प्रतिनिधि इस मौके पर मौजूद

कांग्रेस के कार्यकाल में शुरू हुआ तो भाजपा के कार्यकाल में पूरा हुआ

इस रोड के निर्माण का कार्य 2017 में कांग्रेस के कार्यकाल में शुरू हुआ। अब भाजपा के शासन काल में इसका कार्य पूरा हुआ है। इस सड़क के निर्माण कार्य पर करीब 3 करोड़ 47 लाख रुपए खर्च हुए। इस सड़क के बनने से अब उपरोक्त पंचायत के गांव मंधियार,नंगूई,तबेला गांव की करीब 3 हजार की आबादी इस सुविधा से जुड़ गई है।
सड़क पर बस सेवा शुरू करने के दौरान एचआरटीसी के इंस्पेक्टर रमेश शर्मा, डीएसपी डल्हौजी विशाल वर्मा, इंस्पेक्टर टूरिज्म, लोक निर्माण विभाग के एसडीओ सुरेश कोंडल, जेई अमित शर्मा सहित ग्राम पंचायत मनौला की प्रधान रजनी चोभीयाल, पंचायत द्रड्डा के प्रधान विक्की मंडला, बीडीसी मेंबर अंजू देवी सहित क्षेत्र के अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

सपना साकार हुआ

संबन्धित गांवों के लोगों का कहना था कि आखिरकार वर्षों का उनका सपना पूरा हो गया। उनका कहना था कि इससे पूर्व उनके 5 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करने के लिए मजबूर होना पड़ता था। जब भी उनके क्षेत्र में कोई भी नेता आता तो सबकी मांग सड़क सुविधा ही रहती थी।

अब सिर पर सामान उठाने के लिए नहीं होना पड़ेगा मजबूर

ग्रामीणों का कहना था कि अब उन्हें सिर पर सामान उठाने के लिए अब मजबूर नहीं होना पड़ेगा। सबसे अधिक परेशानी गांव में किसी व्यक्ति के बीमार होने के दौरान पेश आती थी। सड़क नहीं होने की वजह से एंबुलेंस सुविधा नहीं मिल पाती थी। अब उन्हें यह सुविधा प्राप्त हो जाएगी।
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vinod Kumar

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वर्षों से जिसके लिए तरस रहें थे वह सुविधा अब जाकर मिली

Update Time : 08:02:20 pm, Friday, 12 November 2021

5 किलोमीटर सड़क बनाने में लगे चार साल तो खर्च हुए 3 करोड़ 47 लाख

बनीखेत, (मुकेश कुमार गोल्डी): वर्षों से जिसके लिए तरस रहें थे वह सुविधा अब जाकर मिली है। भले ही इसके लिए 4 वर्ष लग गए। हम बात कर रहें है डल्हौजी विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत मनौला की। इस पंचायत के करीब तीन गांव ठंडा पानी से मंधियार गांव सड़क सुविधा के साथ जुड़ गए। महज 5 किलोमीटर लंबी इस सड़क को बनाने में 4 वर्ष लग गए।
डल्हौजी विधानसभा क्षेत्र के दायरे में आने वाली ग्राम पंचायत मनौला के लोगों का इस सुविधा को पाने का इंतजार समाप्त हो गया। एचआरटीसी ने इस सड़क पर बस का ट्रायल किया जिसमें यह सड़क खरा उतरी। इसी के चलते एसडीएम डल्हौजी जगन ठाकुर ने इस सड़क पर बस सेवा शुरू करने के लिए हरी झंडी दिखाकर बस को रवाना किया।
तरस रहें थे जो गांव वह सुविधा अब जाकर मिली
सड़क को तरसते गांवों के पंचायत प्रतिनिधि इस मौके पर मौजूद

कांग्रेस के कार्यकाल में शुरू हुआ तो भाजपा के कार्यकाल में पूरा हुआ

इस रोड के निर्माण का कार्य 2017 में कांग्रेस के कार्यकाल में शुरू हुआ। अब भाजपा के शासन काल में इसका कार्य पूरा हुआ है। इस सड़क के निर्माण कार्य पर करीब 3 करोड़ 47 लाख रुपए खर्च हुए। इस सड़क के बनने से अब उपरोक्त पंचायत के गांव मंधियार,नंगूई,तबेला गांव की करीब 3 हजार की आबादी इस सुविधा से जुड़ गई है।
सड़क पर बस सेवा शुरू करने के दौरान एचआरटीसी के इंस्पेक्टर रमेश शर्मा, डीएसपी डल्हौजी विशाल वर्मा, इंस्पेक्टर टूरिज्म, लोक निर्माण विभाग के एसडीओ सुरेश कोंडल, जेई अमित शर्मा सहित ग्राम पंचायत मनौला की प्रधान रजनी चोभीयाल, पंचायत द्रड्डा के प्रधान विक्की मंडला, बीडीसी मेंबर अंजू देवी सहित क्षेत्र के अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

सपना साकार हुआ

संबन्धित गांवों के लोगों का कहना था कि आखिरकार वर्षों का उनका सपना पूरा हो गया। उनका कहना था कि इससे पूर्व उनके 5 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करने के लिए मजबूर होना पड़ता था। जब भी उनके क्षेत्र में कोई भी नेता आता तो सबकी मांग सड़क सुविधा ही रहती थी।

अब सिर पर सामान उठाने के लिए नहीं होना पड़ेगा मजबूर

ग्रामीणों का कहना था कि अब उन्हें सिर पर सामान उठाने के लिए अब मजबूर नहीं होना पड़ेगा। सबसे अधिक परेशानी गांव में किसी व्यक्ति के बीमार होने के दौरान पेश आती थी। सड़क नहीं होने की वजह से एंबुलेंस सुविधा नहीं मिल पाती थी। अब उन्हें यह सुविधा प्राप्त हो जाएगी।
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