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5:45 am, Friday, 4 April 2025

Chamba News : चम्बा के वन विभाग में बड़ा खुलासा, जांच शुरू होने पर विभाग में हड़कंप मचा

fraud in chamba : जिला चंबा में फर्जी रिकॉर्ड के आधार पर पक्की नौकरी देने का बड़ा खुलासा हुआ है। विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है। कई अधिकारियों व कर्मचारियों तक जांच की आंच पहुंचेगी। 

चंबा,( विनोद ): हिमाचल प्रदेश के जिला चंबा में वन विभाग(Forest department) एक बार फिर सुर्खियों में बन गया है। मामला फर्जी रिकॉर्ड के आधार पर 6 लोगों के नियमितीकरण(regularization) से जुड़ा हुआ है। वन सर्कल चंबा ने मामले की गंभीरता को भांपते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है और एसीएफ डल्हौजी को जांच अधिकारी बनाया है।

यह मामला आरटीआई के माध्यम से सामने आया है। चंबा के मोहल्ला सुल्तानपुर के रहने वाले नरेंद्र सिंह ने आरटीआई के माध्यम से इन मामले की वन विभाग से दस्तावेजों के माध्यम से जानकारी हासिल की। आरटीआई एक्टिविस्ट(RTI activist) नरेंद्र कुमार ने कहा वन मंडल चंबा(Forest Division Chamba) की रेंज मसरूंड से यह मामला जुटा हुआ है।

उन्होंने बताया कि वहां कार्यरत कुछ वन अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से मस्ट्रोल पर लगे 6 लोगों को सरकार व वन विभाग के नियमों को ताक पर रख कर नियमित किया गया जो नियमित नहीं हो सकते थे। उन्होंने कहा कि विभाग के नियमों के तहत पांच वर्ष तक मस्ट्रोल पर लगा होना जरूरी है तो साथ ही इस दौरान प्रत्येक वर्ष कम से कम 240 दिन लगे होने चाहिए।

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 कहां पर क्या कमी पाई  

रिकॉर्ड पर नजर दौड़ाएं तो यह 6 लोग इस शर्त व नियमों को पूरा नहीं करते बावजूद सांठगांठ के चलते उन्हें पक्का कर दिया गया। उन्होंने कहा कि इन लोगों के कार्यकाल से संबंधित दस्तावेजों पर नजर दौड़ाएं तो मस्ट्रोल, कैश बुक(cash book) व एम.बी.रिकार्ड आपस में मेल नहीं खाते है। नरेंद्र कुमार ने कहा कि यह तमाम बातें इस बात को पुख्ता करती है कि मसरूंड रेंज में वर्ष 2013 से 2021 की समयावधि में जिन लोगों को पक्का किया गया उन्हें विभाग के नियम-कायदों को दरकिनार कर पक्का किया गया।

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कौन-कौन आएगा जांच के दायरे में

उन्होंने कहा कि इन मामलों में सीधे तौर पर उस समय वन परिक्षेत्र मसरूंड में कार्यरत रेंज अधिकारी, वन खंड अधिकारी व वन रक्षक की कार्यशैली सवालों के दायरें में घिरती है जिसकी जांच होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि सवाल यह पैदा होता है कि आखिर वह कौन सी बात है जिसके चलते विभाग की आंखों में धूल झोंक कर कुछ लोगों को पक्का किया गया। नरेंद्र कुमार ने कहा कि यह पूरा मामला बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार(corruption on a large scale) होने की तरफ इशारा करता है जिसके चलते इन मामलों की जांच बेहद जरूरी है।

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क्या कहना है अधिकारी का

सीसीएफ वन सर्कल चंबा अभिलाष दमोदर ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि यह मामला ध्यान में आया है जिसके चलते एसीएफ डलहौजी को मामले की जांच करने का जिम्मा सौंपा गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद उसे आगामी कार्रवाई के लिए उच्च स्तर पर भेजा जाएगा। उच्च स्तर पर जिस प्रकार के आदेश प्राप्त होंगे उसके आधार पर अगली कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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VINOD KUMAR

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Chamba News : चम्बा के वन विभाग में बड़ा खुलासा, जांच शुरू होने पर विभाग में हड़कंप मचा

Update Time : 08:53:15 pm, Monday, 26 February 2024

fraud in chamba : जिला चंबा में फर्जी रिकॉर्ड के आधार पर पक्की नौकरी देने का बड़ा खुलासा हुआ है। विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है। कई अधिकारियों व कर्मचारियों तक जांच की आंच पहुंचेगी। 

चंबा,( विनोद ): हिमाचल प्रदेश के जिला चंबा में वन विभाग(Forest department) एक बार फिर सुर्खियों में बन गया है। मामला फर्जी रिकॉर्ड के आधार पर 6 लोगों के नियमितीकरण(regularization) से जुड़ा हुआ है। वन सर्कल चंबा ने मामले की गंभीरता को भांपते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है और एसीएफ डल्हौजी को जांच अधिकारी बनाया है।

यह मामला आरटीआई के माध्यम से सामने आया है। चंबा के मोहल्ला सुल्तानपुर के रहने वाले नरेंद्र सिंह ने आरटीआई के माध्यम से इन मामले की वन विभाग से दस्तावेजों के माध्यम से जानकारी हासिल की। आरटीआई एक्टिविस्ट(RTI activist) नरेंद्र कुमार ने कहा वन मंडल चंबा(Forest Division Chamba) की रेंज मसरूंड से यह मामला जुटा हुआ है।

उन्होंने बताया कि वहां कार्यरत कुछ वन अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से मस्ट्रोल पर लगे 6 लोगों को सरकार व वन विभाग के नियमों को ताक पर रख कर नियमित किया गया जो नियमित नहीं हो सकते थे। उन्होंने कहा कि विभाग के नियमों के तहत पांच वर्ष तक मस्ट्रोल पर लगा होना जरूरी है तो साथ ही इस दौरान प्रत्येक वर्ष कम से कम 240 दिन लगे होने चाहिए।

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रिकॉर्ड पर नजर दौड़ाएं तो यह 6 लोग इस शर्त व नियमों को पूरा नहीं करते बावजूद सांठगांठ के चलते उन्हें पक्का कर दिया गया। उन्होंने कहा कि इन लोगों के कार्यकाल से संबंधित दस्तावेजों पर नजर दौड़ाएं तो मस्ट्रोल, कैश बुक(cash book) व एम.बी.रिकार्ड आपस में मेल नहीं खाते है। नरेंद्र कुमार ने कहा कि यह तमाम बातें इस बात को पुख्ता करती है कि मसरूंड रेंज में वर्ष 2013 से 2021 की समयावधि में जिन लोगों को पक्का किया गया उन्हें विभाग के नियम-कायदों को दरकिनार कर पक्का किया गया।

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कौन-कौन आएगा जांच के दायरे में

उन्होंने कहा कि इन मामलों में सीधे तौर पर उस समय वन परिक्षेत्र मसरूंड में कार्यरत रेंज अधिकारी, वन खंड अधिकारी व वन रक्षक की कार्यशैली सवालों के दायरें में घिरती है जिसकी जांच होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि सवाल यह पैदा होता है कि आखिर वह कौन सी बात है जिसके चलते विभाग की आंखों में धूल झोंक कर कुछ लोगों को पक्का किया गया। नरेंद्र कुमार ने कहा कि यह पूरा मामला बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार(corruption on a large scale) होने की तरफ इशारा करता है जिसके चलते इन मामलों की जांच बेहद जरूरी है।

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सीसीएफ वन सर्कल चंबा अभिलाष दमोदर ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि यह मामला ध्यान में आया है जिसके चलते एसीएफ डलहौजी को मामले की जांच करने का जिम्मा सौंपा गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद उसे आगामी कार्रवाई के लिए उच्च स्तर पर भेजा जाएगा। उच्च स्तर पर जिस प्रकार के आदेश प्राप्त होंगे उसके आधार पर अगली कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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