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5:52 pm, Tuesday, 3 February 2026

Chamba Farmers Award 2026: देशी बीज और पारंपरिक खेती में चंबा के किसान सम्मानित

  • vinod kumar
  • Update Time : 10:32:55 am, Wednesday, 21 January 2026
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Chamba Farmers honored by the Vice Chancellor

Chamba farmers award 2026 ने एक बार फिर साबित कर दिया कि पारंपरिक खेती और देशी बीज ही भविष्य की असली ताकत हैं। जलवायु परिवर्तन के दौर में चंबा के किसानों को मिला यह सम्मान पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है।

चंबा, ( विनोद ): देशी अनाज और फसल जर्मप्लाज्म के संरक्षण एवं गुणन में उत्कृष्ट योगदान के लिए चंबा जिले के दो किसानों को डॉ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी (सोलन) ( University of Horticulture and Forestry, Nauni )में सम्मानित किया गया। यह सम्मान विश्वविद्यालय ( Nauni University ) के कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल द्वारा प्रदान किया गया।

Chamba Farmers Award 2026 native seeds and traditional farming

कृषि विज्ञान केंद्र चंबा के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. धर्मेन्द्र कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि यह सम्मान पौधा संरक्षण एवं कृषक अधिकार अधिनियम (पीपीवी एवं एफआर) के तहत आयोजित विशेष कार्यशाला के दौरान प्रदान किया गया। सम्मानित होने वाले किसानों में विकास खंड सलूणी के गांव तिवारी निवासी किसान पवन कुमार और चंबा विकासखंड के गांव बगोली निवासी किसान अनिल कुमार शामिल हैं।

कार्यशाला के दौरान आयोजित प्रदर्शनी में इन किसानों ने अपनी स्थानीय और पारंपरिक फसल ( traditional crop ) प्रजातियों के देशी बीजों को प्रदर्शित किया, जिससे यह स्पष्ट संदेश मिला कि आधुनिक तकनीक के साथ-साथ पारंपरिक बीजों का संरक्षण ( seed preservation ) ही भविष्य की खाद्य सुरक्षा की सबसे मजबूत नींव है।

डॉ. धर्मेन्द्र कुमार ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच देशी बीजों और पारंपरिक फसलों के महत्व से अवगत कराना था। साथ ही किसानों को अपनी स्थानीय प्रजातियों के संरक्षण, संवर्धन और पंजीकरण के लिए प्रेरित किया गया।

ये भी पढ़ें : चंबा की सीमाओं पर हाई अलर्ट।

इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र चंबा की वैज्ञानिक डॉ. जया और डॉ. नेहा ने भी भाग लिया और किसानों को उनके अधिकारों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। उन्होंने बताया कि संरक्षित जर्मप्लाज्म से जुड़े बीजों को जल्द ही पीपीवी एवं एफआर अधिनियम के तहत पंजीकृत किया जाएगा, जिससे किसानों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे और देशी फसलों का दीर्घकालिक संरक्षण सुनिश्चित होगा।

यह उपलब्धि न केवल चंबा जिले के किसानों के लिए गर्व का विषय है, बल्कि प्रदेश के अन्य किसानों के लिए भी अपनी कृषि विरासत को बचाने और संवारने की एक प्रेरणादायक मिसाल है।

ये भी पढ़ें : चंबा में प्रशासन का डंडा चला।

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vinod Kumar

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Chamba Farmers Award 2026: देशी बीज और पारंपरिक खेती में चंबा के किसान सम्मानित

Update Time : 10:32:55 am, Wednesday, 21 January 2026

Chamba farmers award 2026 ने एक बार फिर साबित कर दिया कि पारंपरिक खेती और देशी बीज ही भविष्य की असली ताकत हैं। जलवायु परिवर्तन के दौर में चंबा के किसानों को मिला यह सम्मान पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है।

चंबा, ( विनोद ): देशी अनाज और फसल जर्मप्लाज्म के संरक्षण एवं गुणन में उत्कृष्ट योगदान के लिए चंबा जिले के दो किसानों को डॉ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी (सोलन) ( University of Horticulture and Forestry, Nauni )में सम्मानित किया गया। यह सम्मान विश्वविद्यालय ( Nauni University ) के कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल द्वारा प्रदान किया गया।

Chamba Farmers Award 2026 native seeds and traditional farming

कृषि विज्ञान केंद्र चंबा के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. धर्मेन्द्र कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि यह सम्मान पौधा संरक्षण एवं कृषक अधिकार अधिनियम (पीपीवी एवं एफआर) के तहत आयोजित विशेष कार्यशाला के दौरान प्रदान किया गया। सम्मानित होने वाले किसानों में विकास खंड सलूणी के गांव तिवारी निवासी किसान पवन कुमार और चंबा विकासखंड के गांव बगोली निवासी किसान अनिल कुमार शामिल हैं।

कार्यशाला के दौरान आयोजित प्रदर्शनी में इन किसानों ने अपनी स्थानीय और पारंपरिक फसल ( traditional crop ) प्रजातियों के देशी बीजों को प्रदर्शित किया, जिससे यह स्पष्ट संदेश मिला कि आधुनिक तकनीक के साथ-साथ पारंपरिक बीजों का संरक्षण ( seed preservation ) ही भविष्य की खाद्य सुरक्षा की सबसे मजबूत नींव है।

डॉ. धर्मेन्द्र कुमार ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच देशी बीजों और पारंपरिक फसलों के महत्व से अवगत कराना था। साथ ही किसानों को अपनी स्थानीय प्रजातियों के संरक्षण, संवर्धन और पंजीकरण के लिए प्रेरित किया गया।

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इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र चंबा की वैज्ञानिक डॉ. जया और डॉ. नेहा ने भी भाग लिया और किसानों को उनके अधिकारों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। उन्होंने बताया कि संरक्षित जर्मप्लाज्म से जुड़े बीजों को जल्द ही पीपीवी एवं एफआर अधिनियम के तहत पंजीकृत किया जाएगा, जिससे किसानों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे और देशी फसलों का दीर्घकालिक संरक्षण सुनिश्चित होगा।

यह उपलब्धि न केवल चंबा जिले के किसानों के लिए गर्व का विषय है, बल्कि प्रदेश के अन्य किसानों के लिए भी अपनी कृषि विरासत को बचाने और संवारने की एक प्रेरणादायक मिसाल है।

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