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12:03 pm, Thursday, 28 May 2026

Dangerous School Route in Himachal: चंबा के स्कूली बच्चे मौत की खाई पार करने को मजबूर

  • Vinod Kumar
  • Update Time : 09:59:08 am, Thursday, 28 May 2026
  • 96

Dangerous School Route in Himachal बना 11 गांवों के लिए बड़ा खतरा

इन दिनों पूरे चंबा में Dangerous School Route in Himachal को लेकर लोगों में भारी चिंता और आक्रोश देखने को मिल रहा है। भरमौर क्षेत्र की दो पंचायतों के दर्जनों बच्चों को शिक्षा हासिल करने के लिए हर दिन मौत का रास्ता पार करना पड़ रहा है। जरा सी चूक सीधे उफनती रावी नदी में समा सकती है। यही वजह है कि पंचायत चुनावों में यह मुद्दा अब बड़ा चुनावी मुद्दा बनता जा रहा है।

 

 

भरमौर/मैहला। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में स्कूली बच्चों के लिए बना यह खतरनाक रास्ता विकास के दावों की भयावह तस्वीर पेश करता नजर आ रहा है। भरमौर विधानसभा क्षेत्र और विकास खंड मैहला के अंतर्गत आने वाले 11 गांवों के लोग हर दिन जान जोखिम में डालकर इस पैदल मार्ग से गुजरने को मजबूर हैं।

 

यह रास्ता इतना जानलेवा है कि जरा सी चूक किसी को भी सीधे कई फुट नीचे बह रही उफनती रावी नदी में समा सकती है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इसी जोखिम भरे रास्ते से होकर 35 से अधिक स्कूली बच्चे रोजाना राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कलसुई पहुंचते हैं।

Agarwal Jewellers Chamba

ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से प्रशासन इस गंभीर समस्या की अनदेखी करता आ रहा है। बीते वर्ष भारी बारिश के बाद यह पैदल मार्ग और अधिक खतरनाक तथा बदहाल हो गया था। हालांकि क्षेत्र के कांग्रेस नेता एवंAPMC चेयरमैन ललित ठाकुर के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन ने मार्ग को अस्थायी रूप से दुरुस्त करवाया, लेकिन खतरा अब भी बरकरार है।

जानकारी के अनुसार बकाणी पंचायत के कैयोटू, सालुई और परूंगणा सहित दाड़वी पंचायत के लोआ, नेगा, रांभो, भैतिरा, जिडू, गुना और दाड़वी गांवों के लोग इसी जोखिम भरे रास्ते से आवाजाही करते हैं। इन गांवों के लिए दूसरा वैकल्पिक मार्ग मौजूद जरूर है, लेकिन उससे लोगों को एक से डेढ़ घंटा अतिरिक्त पैदल सफर तय करना पड़ता है। यही कारण है कि ग्रामीण मजबूरी में मौत के साये वाले इस रास्ते का इस्तेमाल करते हैं।

ये भी पढ़ें: क्या डल्हौजी सिटीजन फोरम थामेगी कांग्रेस का हाथ।

Ravi River Foot Bridge Demand: वर्षों से अधर में लटका पैदल पुल

ग्रामीणों ने बताया कि Ravi River Foot Bridge Demand को लेकर कुछ वर्ष पहले कलसुई से सालुई के बीच रावी नदी पर पैदल पुल निर्माण का प्रस्ताव तैयार कर प्रशासन को सौंपा गया था। पंचायत की ओर से पूरा ब्लूप्रिंट भी भेजा गया, लेकिन आज तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी।

लोगों में सरकार और प्रशासन के प्रति भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि रावी नदी पर स्थायी पैदल पुल का निर्माण हो जाए तो हजारों लोगों को राहत मिलेगी, स्कूली बच्चों की जान सुरक्षित होगी और हर दिन मंडरा रहा मौत का खतरा भी खत्म हो जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि Dangerous School Route in Himachal की वजह से बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा लगातार खतरे में बनी हुई है।

ये भी पढ़ें: चंबा में विकास कार्यों में बड़ा गड़बड़झाला, ग्रामीणों ने खोला भ्रष्टाचार का राज।

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Dangerous School Route in Himachal: चंबा के स्कूली बच्चे मौत की खाई पार करने को मजबूर

Dangerous School Route in Himachal: चंबा के स्कूली बच्चे मौत की खाई पार करने को मजबूर

Update Time : 09:59:08 am, Thursday, 28 May 2026

Dangerous School Route in Himachal बना 11 गांवों के लिए बड़ा खतरा

इन दिनों पूरे चंबा में Dangerous School Route in Himachal को लेकर लोगों में भारी चिंता और आक्रोश देखने को मिल रहा है। भरमौर क्षेत्र की दो पंचायतों के दर्जनों बच्चों को शिक्षा हासिल करने के लिए हर दिन मौत का रास्ता पार करना पड़ रहा है। जरा सी चूक सीधे उफनती रावी नदी में समा सकती है। यही वजह है कि पंचायत चुनावों में यह मुद्दा अब बड़ा चुनावी मुद्दा बनता जा रहा है।

 

 

भरमौर/मैहला। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में स्कूली बच्चों के लिए बना यह खतरनाक रास्ता विकास के दावों की भयावह तस्वीर पेश करता नजर आ रहा है। भरमौर विधानसभा क्षेत्र और विकास खंड मैहला के अंतर्गत आने वाले 11 गांवों के लोग हर दिन जान जोखिम में डालकर इस पैदल मार्ग से गुजरने को मजबूर हैं।

 

यह रास्ता इतना जानलेवा है कि जरा सी चूक किसी को भी सीधे कई फुट नीचे बह रही उफनती रावी नदी में समा सकती है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इसी जोखिम भरे रास्ते से होकर 35 से अधिक स्कूली बच्चे रोजाना राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कलसुई पहुंचते हैं।

Agarwal Jewellers Chamba

ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से प्रशासन इस गंभीर समस्या की अनदेखी करता आ रहा है। बीते वर्ष भारी बारिश के बाद यह पैदल मार्ग और अधिक खतरनाक तथा बदहाल हो गया था। हालांकि क्षेत्र के कांग्रेस नेता एवंAPMC चेयरमैन ललित ठाकुर के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन ने मार्ग को अस्थायी रूप से दुरुस्त करवाया, लेकिन खतरा अब भी बरकरार है।

जानकारी के अनुसार बकाणी पंचायत के कैयोटू, सालुई और परूंगणा सहित दाड़वी पंचायत के लोआ, नेगा, रांभो, भैतिरा, जिडू, गुना और दाड़वी गांवों के लोग इसी जोखिम भरे रास्ते से आवाजाही करते हैं। इन गांवों के लिए दूसरा वैकल्पिक मार्ग मौजूद जरूर है, लेकिन उससे लोगों को एक से डेढ़ घंटा अतिरिक्त पैदल सफर तय करना पड़ता है। यही कारण है कि ग्रामीण मजबूरी में मौत के साये वाले इस रास्ते का इस्तेमाल करते हैं।

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Ravi River Foot Bridge Demand: वर्षों से अधर में लटका पैदल पुल

ग्रामीणों ने बताया कि Ravi River Foot Bridge Demand को लेकर कुछ वर्ष पहले कलसुई से सालुई के बीच रावी नदी पर पैदल पुल निर्माण का प्रस्ताव तैयार कर प्रशासन को सौंपा गया था। पंचायत की ओर से पूरा ब्लूप्रिंट भी भेजा गया, लेकिन आज तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी।

लोगों में सरकार और प्रशासन के प्रति भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि रावी नदी पर स्थायी पैदल पुल का निर्माण हो जाए तो हजारों लोगों को राहत मिलेगी, स्कूली बच्चों की जान सुरक्षित होगी और हर दिन मंडरा रहा मौत का खतरा भी खत्म हो जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि Dangerous School Route in Himachal की वजह से बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा लगातार खतरे में बनी हुई है।

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