×
8:14 am, Saturday, 11 April 2026
17 महीने से लंबित मजदूरी, डीएफओ कार्यालय में बहस के बाद बढ़ा विवाद; जनता से दुर्व्यवहार के आरोप

चंबा वन विभाग हंगामा 😱 17 महीने से मजदूरों को नहीं मिला भुगतान, वन विभाग में गरमाया माहौल

  • vinod kumar
  • Update Time : 11:02:44 am, Saturday, 28 March 2026
  • 2190

चंबा वन विभाग हंगामा का दृश्य

चंबा वन विभाग हंगामा इन दिनों लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। जानकारी के अनुसार, मजदूरों को पिछले 17 महीनों से उनके श्रम का भुगतान नहीं मिला है, जिससे उनमें भारी रोष है। इसी के चलते भाजपा नेता जय सिंह की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल डीएफओ कृतज्ञ कुमार को ज्ञापन सौंपने पहुंचा।

चंबा, ( विनोद ): शुक्रवार को वन मंडल कार्यालय चंबा में उस समय माहौल अचानक गर्मा गया, जब मस्ट्रोल पर कार्यरत मजदूरों का एक प्रतिनिधिमंडल अपनी लंबित मजदूरी के भुगतान की मांग लेकर पहुंचा। यह प्रतिनिधिमंडल भाजपा नेता जय सिंह की अगुवाई में डीएफओ कृतज्ञ कुमार को ज्ञापन सौंपने आया था।
इस दौरान स्थिति धीरे-धीरे बड़े हंगामे में बदलती नजर आई।

🔴 चंबा वन विभाग हंगामा: क्या है पूरा मामला

बताया जा रहा है कि ये मजदूर पिछले 17 महीनों से अपने श्रम का भुगतान न मिलने से परेशान हैं। जब प्रतिनिधिमंडल शांतिपूर्वक अपनी बात रख रहा था, तभी वन परिक्षेत्र के कार्यवाहक रेंज ऑफिसर हितेश की अचानक एंट्री हुई। उनके कुछ कथनों के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई और जय सिंह व संबंधित कर्मचारी के बीच तीखी बहस छिड़ गई।

⚠️ चंबा वन विभाग हंगामा कैसे बढ़ा

चंबा वन विभाग हंगामा के दौरान डीएफओ( ifs ) (Divisional Forest Officer) समेत अन्य वन विभाग के कर्मचारी और मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी भी मौजूद थे। पुलिस ने बीच-बचाव कर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन माहौल तब जाकर शांत हुआ जब कार्यवाहक आरओ कक्ष से बाहर चले गए।

👉 ये भी पढ़ें: चंबा वन विभाग का हैरतंगेज कारनामा!

इस घटना के बाद आम लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि यदि सरकारी कार्यालयों में ही जनता के साथ इस तरह का व्यवहार होगा, तो आम व्यक्ति अपनी समस्या लेकर कहां जाएगा।

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि चंबा वन विभाग हंगामा जैसी स्थिति में एक वरिष्ठ अधिकारी की मौजूदगी में एक कनिष्ठ कर्मचारी जनता के साथ इस तरह का व्यवहार कैसे कर सकता है। क्या उसे किसी का संरक्षण प्राप्त है, या फिर विभागीय अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं?

👉 ये भी पढ़ें: चंबा में महिलाएं बिगाड़ेंगी खेल!

यह पूरा मामला चंबा वन विभाग हंगामा को और बढ़ाता नजर आ रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि संबंधित विभाग इस पर क्या कार्रवाई करता है और मजदूरों को उनका लंबित भुगतान कब तक मिल पाता है।

Oplus_131072
About Author Information

vinod Kumar

Popular Post

चंबा मेडिकल कॉलेज में हंगामा: डॉक्टर व सिक्योरिटी गार्ड से मारपीट, 4 आरोपी डिटेन

17 महीने से लंबित मजदूरी, डीएफओ कार्यालय में बहस के बाद बढ़ा विवाद; जनता से दुर्व्यवहार के आरोप

चंबा वन विभाग हंगामा 😱 17 महीने से मजदूरों को नहीं मिला भुगतान, वन विभाग में गरमाया माहौल

Update Time : 11:02:44 am, Saturday, 28 March 2026

चंबा वन विभाग हंगामा इन दिनों लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। जानकारी के अनुसार, मजदूरों को पिछले 17 महीनों से उनके श्रम का भुगतान नहीं मिला है, जिससे उनमें भारी रोष है। इसी के चलते भाजपा नेता जय सिंह की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल डीएफओ कृतज्ञ कुमार को ज्ञापन सौंपने पहुंचा।

चंबा, ( विनोद ): शुक्रवार को वन मंडल कार्यालय चंबा में उस समय माहौल अचानक गर्मा गया, जब मस्ट्रोल पर कार्यरत मजदूरों का एक प्रतिनिधिमंडल अपनी लंबित मजदूरी के भुगतान की मांग लेकर पहुंचा। यह प्रतिनिधिमंडल भाजपा नेता जय सिंह की अगुवाई में डीएफओ कृतज्ञ कुमार को ज्ञापन सौंपने आया था।
इस दौरान स्थिति धीरे-धीरे बड़े हंगामे में बदलती नजर आई।

🔴 चंबा वन विभाग हंगामा: क्या है पूरा मामला

बताया जा रहा है कि ये मजदूर पिछले 17 महीनों से अपने श्रम का भुगतान न मिलने से परेशान हैं। जब प्रतिनिधिमंडल शांतिपूर्वक अपनी बात रख रहा था, तभी वन परिक्षेत्र के कार्यवाहक रेंज ऑफिसर हितेश की अचानक एंट्री हुई। उनके कुछ कथनों के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई और जय सिंह व संबंधित कर्मचारी के बीच तीखी बहस छिड़ गई।

⚠️ चंबा वन विभाग हंगामा कैसे बढ़ा

चंबा वन विभाग हंगामा के दौरान डीएफओ( ifs ) (Divisional Forest Officer) समेत अन्य वन विभाग के कर्मचारी और मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी भी मौजूद थे। पुलिस ने बीच-बचाव कर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन माहौल तब जाकर शांत हुआ जब कार्यवाहक आरओ कक्ष से बाहर चले गए।

👉 ये भी पढ़ें: चंबा वन विभाग का हैरतंगेज कारनामा!

इस घटना के बाद आम लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि यदि सरकारी कार्यालयों में ही जनता के साथ इस तरह का व्यवहार होगा, तो आम व्यक्ति अपनी समस्या लेकर कहां जाएगा।

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि चंबा वन विभाग हंगामा जैसी स्थिति में एक वरिष्ठ अधिकारी की मौजूदगी में एक कनिष्ठ कर्मचारी जनता के साथ इस तरह का व्यवहार कैसे कर सकता है। क्या उसे किसी का संरक्षण प्राप्त है, या फिर विभागीय अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं?

👉 ये भी पढ़ें: चंबा में महिलाएं बिगाड़ेंगी खेल!

यह पूरा मामला चंबा वन विभाग हंगामा को और बढ़ाता नजर आ रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि संबंधित विभाग इस पर क्या कार्रवाई करता है और मजदूरों को उनका लंबित भुगतान कब तक मिल पाता है।

Oplus_131072