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8:21 am, Saturday, 11 April 2026
तैनाती के बावजूद चार्ज नहीं, मसरूंड रेंज में बढ़ा विवाद

चंबा वन विभाग विवाद: 2 माह से RO दरकिनार, आखिर कौन चला रहा सिस्टम?

  • vinod kumar
  • Update Time : 11:06:11 am, Friday, 27 March 2026
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AI-generated

चंबा वन विभाग विवाद ( chamba van vibhag vivad ) ने तूल पकड़ लिया है, जहां 2 माह बाद भी तैनात रेंज अफसर को चार्ज नहीं दिया गया, जबकि ब्लॉक अधिकारी ही अधिकारों का इस्तेमाल कर रहा है—मामले ने अंदरूनी गड़बड़ी की आशंका बढ़ा दी है।

चंबा, ( विनोद ): हिमाचल के वन मंडल चंबा (Forest Division Chamba) की मसरूंड रेंज में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर चंबा वन विभाग विवाद का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां रेंज अफसर की तैनाती होने के बावजूद उन्हें अब तक आधिकारिक चार्ज नहीं दिया गया, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

🔴 मसरूंड रेंज विवाद: उठे गंभीर सवाल

चंबा वन विभाग विवाद में मसरूंड रेंज, जो अवैध कटान (Illegal Felling) के लिहाज से संवेदनशील मानी जाती है, अब नए सवालों के घेरे में है। फरवरी में तैनाती के बावजूद रेंज ऑफिसर को अब तक चार्ज नहीं दिया गया, जबकि ब्लॉक अधिकारी ही काम संभाल रहा है। क्या यह सिर्फ देरी है या इसके पीछे कोई बड़ा खेल? इस चंबा वन विभाग विवाद को लेकर स्थानीय स्तर पर संदेह और चर्चा तेज हो गई है।

⚠️ डेडलाइन से पहले भुगतान, बढ़ा संदेह

सूत्रों के अनुसार, 31 मार्च से पहले विभागीय कार्यालयों में कई वित्तीय बिलों का भुगतान होता है। ऐसे में यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि कहीं वित्तीय लेनदेन को प्रभावित करने के लिए जानबूझकर चार्ज रोका तो नहीं गया। ऐसे में माना जा रहा है कि 31 मार्च के बाद ही असल सच्चाई सामने आ सकती है, जब सभी भुगतान और रिकॉर्ड सार्वजनिक होंगे।

ये भी पढ़ें: आधी आबादी ने बिगाड़ा खेल!

🗣️ अधिकारियों के बयान

रेंज अफसर राजेश पठानिया ने स्पष्ट कहा कि“मुझे अभी तक रेंज का अधिकारिक चार्ज नहीं मिला है, हालांकि एक सप्ताह के भीतर मिलने की उम्मीद है।”

वहीं, मुख्य वन अरण्यपाल राकेश कुमार ने कहा है कि“रेंज अफसर को चार्ज क्यों नहीं दिया गया, इस बारे में संबंधित डीएफओ से जवाब मांगा जाएगा और पूरे मामले की जांच करवाई जाएगी।”

🚨 क्या खुलेंगे बड़े राज?

चंबा वन विभाग विवाद अब सिर्फ एक प्रशासनिक देरी नहीं, बल्कि संभावित गड़बड़ी या दबाव की ओर इशारा कर रहा है। अगर इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होती है, तो हिमाचल प्रदेश वन विभाग की लापरवाही और वित्तीय अनियमितताओं के बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।

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ये भी पढ़ें: chamba में पैनिक बाईंग पर रोक!

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Update Time : 11:06:11 am, Friday, 27 March 2026

चंबा वन विभाग विवाद ( chamba van vibhag vivad ) ने तूल पकड़ लिया है, जहां 2 माह बाद भी तैनात रेंज अफसर को चार्ज नहीं दिया गया, जबकि ब्लॉक अधिकारी ही अधिकारों का इस्तेमाल कर रहा है—मामले ने अंदरूनी गड़बड़ी की आशंका बढ़ा दी है।

चंबा, ( विनोद ): हिमाचल के वन मंडल चंबा (Forest Division Chamba) की मसरूंड रेंज में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर चंबा वन विभाग विवाद का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां रेंज अफसर की तैनाती होने के बावजूद उन्हें अब तक आधिकारिक चार्ज नहीं दिया गया, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

🔴 मसरूंड रेंज विवाद: उठे गंभीर सवाल

चंबा वन विभाग विवाद में मसरूंड रेंज, जो अवैध कटान (Illegal Felling) के लिहाज से संवेदनशील मानी जाती है, अब नए सवालों के घेरे में है। फरवरी में तैनाती के बावजूद रेंज ऑफिसर को अब तक चार्ज नहीं दिया गया, जबकि ब्लॉक अधिकारी ही काम संभाल रहा है। क्या यह सिर्फ देरी है या इसके पीछे कोई बड़ा खेल? इस चंबा वन विभाग विवाद को लेकर स्थानीय स्तर पर संदेह और चर्चा तेज हो गई है।

⚠️ डेडलाइन से पहले भुगतान, बढ़ा संदेह

सूत्रों के अनुसार, 31 मार्च से पहले विभागीय कार्यालयों में कई वित्तीय बिलों का भुगतान होता है। ऐसे में यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि कहीं वित्तीय लेनदेन को प्रभावित करने के लिए जानबूझकर चार्ज रोका तो नहीं गया। ऐसे में माना जा रहा है कि 31 मार्च के बाद ही असल सच्चाई सामने आ सकती है, जब सभी भुगतान और रिकॉर्ड सार्वजनिक होंगे।

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🗣️ अधिकारियों के बयान

रेंज अफसर राजेश पठानिया ने स्पष्ट कहा कि“मुझे अभी तक रेंज का अधिकारिक चार्ज नहीं मिला है, हालांकि एक सप्ताह के भीतर मिलने की उम्मीद है।”

वहीं, मुख्य वन अरण्यपाल राकेश कुमार ने कहा है कि“रेंज अफसर को चार्ज क्यों नहीं दिया गया, इस बारे में संबंधित डीएफओ से जवाब मांगा जाएगा और पूरे मामले की जांच करवाई जाएगी।”

🚨 क्या खुलेंगे बड़े राज?

चंबा वन विभाग विवाद अब सिर्फ एक प्रशासनिक देरी नहीं, बल्कि संभावित गड़बड़ी या दबाव की ओर इशारा कर रहा है। अगर इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होती है, तो हिमाचल प्रदेश वन विभाग की लापरवाही और वित्तीय अनियमितताओं के बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।

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