चंबा के मैहला में सरकार गांव के द्वार कार्यक्रम उस समय हाई वोल्टेज ड्रामा में बदल गया जब भरमौर विधायक डॉ. जनकराज अपने समर्थकों के साथ पहुंचे और मंच पर बैठने के बजाय जमीन पर बैठ गए। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम से कार्यक्रम स्थल पर मौजूद नेता और अधिकारी हैरान रह गए और माहौल कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गया।
चंबा, ( विनोद ): मंच पर मौजूद मुख्यातिथि एवं विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप पठानिया ने विधायक से मंच पर आने का आग्रह किया। उपायुक्त मुकेश रेपस्वाल ने भी व्यक्तिगत रूप से मनाने की कोशिश की, लेकिन विधायक अपने रुख पर अड़े रहे। स्थिति को संभालने के लिए एपीएमसी चेयरमैन ललित ठाकुर और एसडीएम भरमौर मंच से नीचे उतरे और विधायक से चर्चा की। काफी मनाने के बाद वे विधायक को मंच तक लेकर आए। मंच पर बैठने के बाद हालात सामान्य हुए।

विधायक के तेवर: “3 साल से उठा रहा हूं जनता की आवाज”
मंच से संबोधित करते हुए डॉ. जनकराज ने कहा कि पांगी-भरमौर क्षेत्र की जनता की समस्याएं वे पिछले तीन वर्षों से सरकार के समक्ष उठा रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि:
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स्कूलों में शिक्षकों के पद लंबे समय से खाली हैं
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अस्पतालों में डॉक्टर और स्टाफ की कमी बनी हुई है
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विभिन्न विभागों में रिक्त पदों के कारण विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं
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कुछ अधिकारी जनप्रतिनिधियों के फोन तक नहीं उठाते
विधायक ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ बताते हुए संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

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📌 पांगी-भरमौर की समस्याओं पर गरमाई राजनीति
इस घटनाक्रम ने कार्यक्रम को पूरी तरह से राजनीतिक रंग दे दिया। ‘सरकार गांव के द्वार’ जैसे जनसंपर्क कार्यक्रम में विधायक का विरोध स्वरूप जमीन पर बैठना जिले की राजनीति में बड़ी हलचल माना जा रहा है। स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम क्षेत्रीय विकास, रिक्त पदों और प्रशासनिक उदासीनता के मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति हो सकती है।


Vinod Kumar 








